Sunday, 3 November 2019

Jawab e Dil (Malali reply of Parveen Shakir Shayri)

गुज़र गए  हज़ार आफ़्ताब ब-अंजुमन,
वो माह-ए-ताबाँ भी आज बस्र-ए-रहम में आया।

तोड़ दिया जब दम, तो अहमद 
क्या ही अहम कि बंदा अयादत में आया 

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