Ahmed Muazzam Utraulvi
Thursday, 10 July 2025
माह ए रुख़सार
ख़ामख़ा देखते हैं ईद का चाँद लोग,
देखा नहीं जिन्होंने माह-ए-रुख़सार तेरा।
तेरे इक तबस्सुम पे मायल हो गया मैं,
तेरे इक दीदार ने ले लिया ईमान मेरा।
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