Ahmed Muazzam Utraulvi
Friday, 7 August 2015
Saza
मुझको मोहब्बत की सज़ा दे गया कोई
रोज़ मरने की वजह दे गया कोई
मैं अब भी ब हयात हूँ कैसे
शायद लम्बी उम्र की बद्दुआ दे गया कोई !
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