Thursday, 10 July 2025

माह ए रुख़सार

ख़ामख़ा देखते हैं ईद का चाँद लोग,
देखा नहीं जिन्होंने माह-ए-रुख़सार तेरा।


तेरे इक तबस्सुम पे मायल हो गया मैं,
तेरे इक दीदार ने ले लिया ईमान मेरा।

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